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BPSC Assistant Engineer Recruitment: पटना हाईकोर्ट ने बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से दायर अपील को मंजूर करते हुए राज्य में 1284 सहायक अभियंता की बहाली का रास्ता साफ कर दिया है। मंगलवार को न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय तथा न्यायमूर्ति पार्थ सारथी की खंडपीठ ने बीपीएससी की ओर से दायर अपील पर 82 पन्ने का अपना फैसला सुनाया। 

खंडपीठ ने पिछले दिनों मामले पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिन चार प्रश्नों पर आपत्ति जताई गई थी, उस पर विशेषज्ञ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी। जिसके आधार पर आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है। कोर्ट का मानना था कि विशेषज्ञ कमेटी में सभी अपने विषय के काफी जानकर हैं। उनकी रिपोर्ट में कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

गौरतलब है कि 1284 असिस्टेंट इंजीनियर की बहाली के लिए आयोग ने विज्ञापन प्रकाशित किया था। इसके लिए 28,874 उम्मीदवारों ने आवेदन किए थे। 15 सितम्बर 2018 को हुई प्रारंभिक परीक्षा में 17,865 परीक्षार्थी ने 46 केंद्रों पर परीक्षा दी। जिसके बाद आयोग ने उम्मीदवारों से आंसर की पर आपत्ति की मांग की थी। उम्मीदवारों की ओर से 1267 आपत्ति आई थीं। छात्रों की ओर से आई आपत्तियों पर विशेषज्ञ कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में आईआईटी, एनआईटी तथा बीआईटी के प्रोसेफर को रखा गया था। उनकी रिपोर्ट के बाद प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया। 

गलत प्रश्नों की बात कह हाईकोर्ट में पांच अलग-अलग रिट याचिका दाखिल की गई। इसमें इंजीनियरिंग की अथॉरिटी किताबों का रेफरेंस देते हुए, गलत होने का दावा किया था। साथ ही उनकी जांच एक अलग विशेषज्ञ कमिटी से करवाने की मांग की। इन सभी याचिकाओं पर न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की एकलपीठ ने 26 मार्च 2019 को एक साथ सुनवाई की। आयोग ने कोर्ट को बताया कि 27 मार्च 2019 को मुख्य परीक्षा का आयोजन किया गया है। ऐसे में इन आवेदकों को परीक्षा में शामिल करना संभव नहीं है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुन बीपीएससी को चार प्रश्नों के मॉडल आंसर पर उठाई गई आपत्ति पर फिर से मूल्यांकन करने के लिए नई विशेषज्ञ कमेटी का गठन करने का आदेश दिया। साथ ही सारी प्रक्रिया पूरी कर दस सप्ताह के भीतर नए सिरे से रिजल्ट प्रकाशित करने का आदेश दिया।

आयोग ने एकलपीठ के फैसले को अपील दायर कर चुनौती दी। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि असिस्टेंट इंजीनियर की बहाली के लिए ली गई प्रारंभिक परीक्षा के मॉडल आंसर व रिज़ल्ट को फिर से मूल्यांकन के लिए नई विशेषज्ञ कमेटी को बैठाने की कोई ज़रूरत नहीं है। कोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को निरस्त करते हुए बहाली प्रक्रिया का रास्ता साफ कर दिया।

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