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लखनऊ के डीएम रहे सत्येन्द्र सिंह अपनी तैनाती के दौरान अक्सर चर्चा में रहे। वैसे यह चर्चा किसी अच्छे कार्य की बजाए उनकी कार्यशैली से जुड़ी थी। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें अप्रैल 2016 में खूब वायरल हुईं। इनमें एक में जान बचाने के लिए आगे-आगे भागते दिख रहे थे, पीछे भीड़। एक तस्वीर में वह रेलिंग फांद कर अपनी जान बचाते दिखे।

अप्रैल 2016 में पंचायत चुनाव के दौरान बिसवां के सपा विधायक रामपाल यादव ने बगावत कर दी थी। पार्टी ने उनको निलम्बित कर दिया। गोमती नगर के जियामऊ में भी रामपाल यादव का अवैध कॉम्पलेक्स था। शासन के निर्देश पर बतौर एलडीए वीसी सत्येन्द्र सिंह अवैध कॉम्पलेक्स ढहाने पहुंचे। वहां पहले से मौजूद विधायक और समर्थक प्रवर्तन दल पर टूट पड़े। उस समय लखनऊ में एसएसपी राजेश पाण्डेय थे जो मौके पर थे। एलडीए अधिकारियों से बात करने के लिए विधायक उस तरफ गए। विधायक ने सत्येन्द्र सिंह से गाली गलौज शुरू कर दी। बिना पुलिस को इशारा किए सत्येन्द्र सिंह एक दम से अपनी गाड़ी की ओर दौड़े। पीछे-पीछे विधायक और समर्थक। बीच में रेलिंग आई तो उसे भी फांद गए। यहां तक कि सचिव एलडीए श्रीश चन्द्र वर्मा को भी अकेला छोड़ गए। इसके पूर्व वह बहराइच के डीएम थे। वहां उनकी वर्ष 2014 में अपने अर्दली से जूते के फीते बंधवाने वाली फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।

वह मेरठ व मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रहे हैं तो बांदा, चंदौली व फर्रूखाबाद के डीएम भी रहे हैं। सचिव पशुधन पद पर तैनाती से पहले वह एपीसी शाखा में भी सचिव रहे। एपीसी शाखा में विशेष सचिव रहते हुए वह सचिव पद पर प्रोन्नत हुए थे।

जनता के लिए दरवाजे बंद कर दिए
सत्येन्द्र सिंह 27 जुलाई 2016 से 21 जनवरी 2017 तक लखनऊ के डीएम रहे। कार्यभार संभालने के कुछ दिनों बाद ही वह एक बार फिर चर्चा में आए। हुआ यूं कि उन्होंने आम जनता के लिए डीएम आवास के दरवाजे बंद करा दिए। जो गेट उनके पूर्व डीएम रहे राज शेखर (मौजूदा कानपुर कमिश्रर) के समय खुले रहते थे वह बंद कर दिए गए। दोनों गेट पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात कर दी गई। हालांकि उसके बाद से यह व्यवस्था आज भी जारी है।

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