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गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली दो जजों की डिवीजन बेंच ने सूरत एयरपोर्ट पर रनवे नंबर 22 के वेसू एंड उड़ानों के लिए बाधा बन रही इमारतों के मामले में डीजीसीए और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) को फटकार लगाई है।

आपको बता दें कि यह बेंच सामाजिक कार्यकर्ता विश्वास भांबुरकर की 2019 में दायर याचिका पर सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता विश्वास भांबुरकर के अनुसार, एयरपोर्ट के रनवे नंबर 22 के वेसू छोर पर 45 ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो फ्लाइट के टेकऑफ और लैंडिंग में अवरोध हैं। वर्तमान में सूरत एयरपोर्ट से प्रतिदिन 50 से ज्यादा उड़ानों का आवागमन होता हैं। इनमें से 18 अवैध तरीके से बनाई गई हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह तोड़ा जाना चाहिए। 

सुनवाई के दौरान इमारती बाधाओं पर पूछे गए सवाल पर डीजीसीए के वकील ने गोलमोल जवाब दिया तो चीफ जस्टिस भड़क गए। उन्होंने कहा कि गोल-गोल घुमाना बंद कीजिए। आप डेढ़ साल से इस मामले में तीन दर्जन लोगों को नोटिस दे चुके हैं। हियरिंग भी हो चुकी है। यह समय की बर्बादी है। इमारती बाधा है या नहीं इस पर हमें स्पष्ट जवाब चाहिए। हमें इस पर हलफनामा चाहिए। इस पर डीजीसीए के वकील ने कहा कि हम दो दिन के अंदर एफिडेविट फाइल कर देंगे। अब इस मामले में अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी। 

याचिका कर्ता विश्वास भांबुरकर ने बताया कि, एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत बाधा बन रही इमारतों का टूटना तय है। बाधा बन रहे कुल 45 प्रोजेक्ट हैं। इनमें से 18 ग्राउंड फ्लोर से तोड़े जा सकते हैं। अगर इमारतें वैध हैं तो उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। अगर अवैध हैं तो उन्हें तोड़ दिया जाएगा।

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