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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने किसान संगठनों और सरकार के बीच आठवें दौर की बातचीत के भी बेनतीजा रहने के बाद शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि तारीख पे तारीख देना उसकी रणनीति है। उन्होने ट्वीट कर कहा, “नीयत साफ नहीं है जिनकी, तारीख पे तारीख देना स्ट्रैटेजी है उनकी।”

गौरतलब है कि सरकार और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच तीन कृषि कानूनों को लेकर शुक्रवार को आठवें दौर की वार्ता बेनतीजा रही। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े किसान नेताओं ने शुक्रवार को सरकार से दो टूक कहा कि उनकी ”घर वापसी” तभी होगी जब वह इन कानूनों को वापस लेगी। सरकार ने कानूनों को पूरी तरह से निरस्त करने की मांग खारिज करते हुए इसके विवादास्पद बिन्दुओं तक चर्चा सीमित रखने पर जोर दिया।

किसान संगठनों की मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए। अपनी मांगों को लेकर हजारों किसान दिल्ली के निकट पिछले करीब 40 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि ये कानून कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के कदम हैं और इनसे खेती से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी तथा किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकते हैं।

प्रियंका बोलीं, किसानों की समस्या का समाधान हो
कृषि कानूनों पर केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों की बातचीत के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा है कि कृषि कानून को रद्द करना ही समाधान है। किसानों के समर्थन में बीते कई दिनों से धरना दे रहे कांग्रेस सांसदों से मुलाकात के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि हम बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। हम किसानों के साथ हमेशा रहे हैं। बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। समाधान यही है कि कानून वापस लें और कोई समाधान नहीं है। किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व लगातार केंद्र सरकार पर हमला कर रहा है। गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी सरकार को कई मुद्दों पर घेरा था। पंजाब के कांग्रेस सांसद जंतर-मंतर पर पिछले 32 दिनों से धरने पर बैठे हैं।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर चलाया अभियान
कांग्रेस ने किसानों के समर्थन में सोशल मीडिया अभियान चलाया, जिसके तहत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने लोगों से किसान आंदोलन के पक्ष में आवाज बुलंद करने की अपील की। राहुल गांधी ने किसान के लिए भारत बोले अभियान के तहत वीडियो जारी कर कहा, शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र का एक अभिन्न हिस्सा होता है। हमारे किसान बहन-भाई जो आंदोलन कर रहे हैं, उसे देश भर से समर्थन मिल रहा है। आप भी उनके समर्थन में अपनी आवाज जोड़कर इस संघर्ष को बुलंद कीजिए ताकि कृषि-विरोधी कानून खत्म हों। पार्टी के कई अन्य नेताओं ने भी इस अभियान के तहत अपनी बात रखी और लोगों से किसानों के साथ खड़े होने की अपील की।



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