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उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान एक सुनार की दुकान से 20 तोला सोना, एक किलो चांदी और डेढ़ लाख रुपये नकद लूटने के आरोपी युवक को अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह आरोपी दिलबर नेगी की हत्या में भी आरोपी है। उसके खिलाफ दंगों के दस से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव की अदालत ने गोकुलपुरी थाने में दर्ज इस मामले की एफआईआर के मद्देनजर यह आदेश दिए हैं।  अदालत ने कहा है कि आरोपी और पीड़ित परिवार एक ही इलाके के रहने वाले हैं। इस आरोपी के खिलाफ हत्या से लेकर हत्या का प्रयास, लूट, आगजनी आदि गंभीर अपराध के एक दर्जन के करीब मुकदमे दर्ज हैं और इन सभी घटनाओं के पीड़ित उसी इलाके के रहने वाले हैं, जहां यह आरोपी रहता है। ऐसे में पीड़ित परिवारों व गवाहों के प्रभावित होने की पूरी संभावना है।

वहीं, बचाव पक्ष की दलील थी कि इस मामले के कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उनके मुवक्किल को भी समानता के आधार पर जमानत मिलनी चाहिए, लेकिन अदालत ने कहा कि प्रत्येक मामले में हर व्यक्ति की अलग-अलग भूमिका होती है। कुछ लोग दंगाइयों के साथ खड़े नजर आए। उन्हें भी गिरफ्तार किया गया, लेकिन उन्हें जल्द जमानत मिल गई क्योंकि उनकी भूमिका दंगाइयों के साथ खड़े रहने भर की थी।

वहीं, कुछ आरोपी सक्रिय रूप से मार-काट, लूट व आगजनी करते सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहे हैं। इससे साफ है कि वह दंगों में सक्रिय रूप से सम्मिलित थे। ऐसे आरोपी जमानत पाने के हकदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने इरादतन कथित अपराध को अंजाम दिया। हालांकि, अदालत ने कहा कि यह प्रथमदृष्टया टिप्पणी है। इसका प्रभाव मुकदमे की सुनवाई पर नहीं पड़ेगा। संबंधित अदालत पूरा मामला सुनने के बाद ही निर्णय करेगी। यहां सिर्फ जमानत याचिका पर सुनवाई पर निर्णय किया जा रहा है।

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