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कवि सम्मेलन के मंच से किसी हिंदी सिनेमा तक पहुंचने वाले गोपाल दास नीरज की आज 96वीं जयंती है। राजकपूर से लेकर देवानंद जैसे सितारों के साथ काम करने वाले गोपालदास नीरज का फिल्मी सफर काफी रोचक रहा है। फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री के लिए जब लोग चक्कर लगाते थे, उस दौर में गोपालदास नीरज को देवानंद ने खुद काम करने का ऑफर दिया था। गोपालदास नीरज ने एक इंटरव्यू में बताया था कि देवानंद एक कवि सम्मेलन में चीफ गेस्ट बनकर आए थे। इस दौरान उनकी कविताएं सुनने के बाद उन्होंने कहा था कि एक दिन आपके साथ काम करूंगा। 

नीरज ने इंटरव्यू में बताया था, ‘कुछ समय बाद मैंने देवानंद की फिल्म प्रेम पुजारी के बारे में पढ़ा था। इस पर मैंने उन्हें खत लिखा था और जवाब आया कि आ जाओ। मैं 6 दिनों की छुट्टी लेकर देवानंद के पास गया। उन्होंने एसडी बर्मन से मिलवाया, जिन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि मैं उनके लिए गीत लिख पाऊंगा। इसके बाद मैंने धुन सुनी और फिर रात भर गीत लिखने के बाद मैंने रंगीला रे तैयार किया। इस गीत को पढ़कर देवानंद झूम उठे थे’ इसके बाद उनकी मुलाकात राजकपूर से हुई थी। इस दौरान राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ फिल्म के बारे में बताया और गोपाल दास नीरज ने इस फिल्म के लिए ‘ऐ भाई जरा देख के चलो’ गाना लिखा, जो काफी हिट हुआ। खासतौर पर देवानंद के लिए गोपालदास नीरज ने कई हिट गाने लिखे थे।

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गोपाल दास नीरज कहते हैं कि फिल्मों के तमाम गीत जो काफी लोकप्रिय हुए हैं, वह गाने नहीं बल्कि उनकी कविताएं ही थीं। ‘कारवां गुजर गया, गुबार देखते रहे’ और ‘लिखे जो खत तुझे’ जैसे गाने नीरज की कविताओं से ही निकले थे। ‘लिखे जो खत तुझे’ गाने को फिल्म में शामिल करने का किस्सा भी काफी रोचक है। दरअसल इसे नीरज ने तीन पन्ने की एक लंबी सी कविता के तौर पर लिखा था। यह लंबी कविता उन्होंने संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन के शंकर को दी थी। वह ऐसा दौर था, जब संगीतकार के निर्देश पर गीतकार लिखा करते थे। नीरज को यह पता नहीं था कि इस कविता का क्या होगा, लेकिन फिर उसे लंबी कविता से लिखे जो खत तुझे गाना निकला। इस गाने को कन्यादान फिल्म में शामिल किया गया था। 

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अपने गानों की लोकप्रियता को लेकर गोपालदास नीरज ने कहा था, ‘मेरे गानों की लोकप्रियता की वजह यह थी कि वह उस दौर में लोगों की पसंद के आधार पर थे। इसके अलावा सरल शब्दों में कठिन बात कहने के मेरे तरीको को भी काफी पसंद किया गया था। इसे काफी पसंद किया गया क्योंकि तब कठिन बात को कठिन शब्दों में ही कहने का प्रचलन था।’ मेरा नाम जोकर फिल्म के गाने ऐ भाई जरा देख के चलो को लेकर वह कहते हैं कि यह गाना भले ही काफी सरल लगता है, लेकिन इसमें पूरे जीवन का दर्शन दिखाया गया है।

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