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उत्तर प्रदेश के बदायूं में गैंगरेप के बाद आंगनबाड़ी सहायिका की निर्मम हत्या के मामले में पीड़ित परिवार के लोग थाना पुलिस के रवैए से काफी आहत हैं। बेटा खुलकर बोल रहा है कि रात को दरिंदे उसकी मां की लाश दरवाजे पर छोड़ गए। जबकि अगले दिन सुबह ही थाने गए और पुलिस को मामला बताया लेकिन पुलिस ने उनकी बात ही नहीं सुनी। इस पर वापस घर लौट आए। डायल-112 पर फोन किया तो कुछ देर बाद पुलिस मौके पर पहुंच गई और इसके बाद थाना पुलिस भी वहां आ गई और आगे की कार्रवाई की गई। परिजनों को यह भी टीस है कि अगर पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो आज वह दरिंदा कानून के शिकंजे में होता।

मृतका के बेटे ने बताया कि रविवार रात लगभग साढ़े 11 बजे महंत सत्यनारायण, उसका चेला व ड्राइवर बोलेरो से उसके घर पहुंचे और मां की लाश दरवाजे पर छोड़कर फरार हो गए। पूछने पर बताया कि वह कुएं में गिर गयी थी। इसलिए चोट लगी है। परिवार के सभी सदस्य जबतक बाहर आए तो तीनों दरिंदे भाग चुके थे। परिजनों ने लहूलुहान हालत में महिला को देखा लेकिन तबतक उसकी सांसें थम चुकी थीं। बारिश का मौसम था, इसलिए रातभर परिजन खामोश रहे। दिन निकलने पर बारिश रुकी तो सोमवार को इसकी सूचना देने थाने पहुंचे लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी एक बात न सुनी। थाने में जाकर बताया कि मां की हत्या करके लाश फेंकी गयी है, कार्रवाई को लेकर मिन्नतें भी कीं लेकिन किसी ने उनकी तरफ देखा तक नहीं। ऐसे में निराश होकर घर लौट आए। 

कंट्रोल रूम की सूचना पर पहुंची पुलिस
डायल-112 की टीम ने इसकी जानकारी कंट्रोल रूम को दी तो थाना पुलिस मजबूरन तकरीबन 17 घंटे बाद मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। 

पंचनामे के समय ही फूल गए हाथ पांव
पंचनामे की कार्रवाई के दौरान पुलिस ने जब शव की दुर्दशा देखी तो हाथ पांव फूल गए। अधिकारियों को पूरा मामला बताया तो अफसर भी सकते में आ गए। परिवार वालों का आक्रोश भी पनपता दिख रहा था। यही वजह रही कि मंगलवार को पोस्टमॉर्टम हाउस पर एसओ वजीरगंज अमित कुमार की ड्यूटी लगाई गई। अमित कुमार पूरे मामले को साधे रहे। वह पहले भी उघैती थाने में तैनात रह चुके हैं, इसलिए वहां के लोगों से उनका परिचय भी है।

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