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आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के खिलाफ जारी हुआ अरेस्ट वारंट वैश्विक आतंकी के खिलाफ पहला छोटा कदम है, जिसे इस्लामाबाद की ओर से अब तक लापता बताया जा रहा था। पाकिस्तानी कूटनीतिज्ञों ने पिछले साल फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) को बताया था कि मसूद के खिलाफ इसलिए कार्रवाई नहीं का जा सकी है क्योंकि वह लापता है। भारतीय अधिकारियों ने तब पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए बताया था कि वह आतंकी संगठन के बहावलपुर स्थित हेडक्वार्टर मरकज-ए-उस्मान-ओ-अली, रेलवे लिंक रोड के बमरोधी घर में रह रहा है।  

एफएटीएफ ने इस्लामाबाद को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है जिसकी वजह से प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार के लिए आईएमएफ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक सहायता लेना कठिन हो गया है। साझा विपक्ष से इमरान खान को कड़ी चुनौती मिल रही है। विपक्ष इमरान के खिलाफ माहौल बनाने में जुटा है। पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि इमरान खान को सत्ता में बने रहने के लिए अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना होगा ताकि लोग विपक्ष की मुहिम से अधिक प्रभावित ना हों। हालांकि, नियाजी के लिए यह आसान नहीं है। 

दशकों तक पाकिस्तान मसूद अजहर के लिए ढाल बना रहा तो यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल की बैठक में इस्लामाबाद के साथ बीजिंग ने भी उसका बचाव किया। अब उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी की गिरफ्तारी पर भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्तान की छटपटाहट और मजबूरी को दिखाता है। 

पाकिस्तान पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि इस्लामाबाद तालिबान से शांति वार्ता में अमेरिका की मदद के बदले राष्ट्रपति बनने जा रहे जो बाइडेन के प्रशासन से एफएटीएफ की बैठक में समर्थन चाहेगा। पाकिस्तान अपने पाले आतंकी समूहों के जरिए अफगानिस्तान में हिंसा भी करवा सकता है ताकि अमेरिकी प्रशासन को मना सके।

अधिकारी इस बात को रेखांकित करते हैं कि आतंकवाद के दो सबसे खौफनाक चेहरों में से कोई भी आतंकवाद के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को मारने के आरोपों का सामना नहीं कर रहा है, बल्कि टेरर फाइनेंसिंग का आरोप लगाया गया है। जकी-उर-रहमान लखवी ने मुंबई में 26/11 हमलों के लिए साजिश रची थी। एफएटीएफ लिस्ट से बाहर निकलने के लिए इमरान खान सरकार पर बने दबाव का जिक्र करते हुए आतंकरोधी अधिकारी ने कहा, ”इस छोटे कदम के पीछे संदेश बेहद अहम है।”

एफएटीएफ की पिछली बैठक में पाकिस्तान को चेतावनी दे दी गई थी कि वह टेरर फंडिंग को रोकने के लिए और कदम उठाए नहीं तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि अजहर के खिलाफ अरेस्ट वारंट और लखवी की गिरफ्तारी ऐसे कदम हैं जिनसे पीछे हटा जा सकता है। लखवी ने 26/11 हमलों के बाद सलाखों के पीछे समय बिताया, हालांकि वह जेल में भी विलासिता से रहा और बाप भी बना। लेकिन ग्लोबल प्रेशर कम होने के बाद उसे रिहा कर दिया गया।  

अधिकारी ने कहा, ”इन कदमों से कुछ प्रगति दिखती है, भले ही गति कम हो।” भारतीय अधिकारी मानते हैं कि दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कदम उठाने के लिए भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ रहा है। 1993 में मुंबई बम धमकों की साजिश रचने वाला दाऊद इब्राहिम भागकर पाकिस्तान चला गया था। पिछले दो दशक से वह कराची में रहते हुए दक्षिण एशिया के सबसे बड़े क्राइम सिंडिकेट को चला रहा है। कराची में उसके ठिकानों को लेकर भारत की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने के बावजूद इस्लामाबाद दावा करता रहा है कि दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में नहीं है। 

अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ खुद को गंभीर दिखाने के लिए दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई इमरान खान सरकार के लिए एसिड टेस्ट जैसा है। दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान के पावर सर्किट में अच्छी तरह से काबिज है। यूएनएससी और अमेरिका के ग्लोबल आतंकियों की सूची में शामिल दाऊद इब्राहिम ने 2005 में अपनी बेटी महरुख की शादी पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनैद मियांदाद से की थी। भारतीय खुफिया जानकारी के मुताबिक, महरुख और जुनैद ने पुर्तगाली पासपोर्ट हासिल कर लिए हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर वे देश छोड़ सकें।

अबू सलेम, जो कभी दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी था और 1993 में बाहर होने से पहले पाकिस्तान भाग गया था, वह भी पुर्तगाल चला गया था, जहां उसे 2002 में गिरफ्तार किया गया था और तीन साल बाद भारत प्रत्यर्पित किया गया था। 1994 में मसूद अजहर भी पुर्तगाली पासपोर्ट के जरिए भारत में घुसा था, जिसे जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में विमान हाईजैक के जरिए उसे छुड़ा लिया गया था।

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