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पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सीमा विवाद को लेकर गतिरोध शुरू होने से दो साल पहले अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए रणनीति तैयार की थी। हाल में सामने आए अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, इसमें चीन के साथ सीमा विवाद जैसी चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत को राजनयिक और सैन्य समर्थन देने की बात कही गई थी। साल 2018 की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2017 के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा बनाई गई रणनीति का समर्थन किया था। व्हाइट हाउस द्वारा तैयार की गई एक राष्ट्रीय सुरक्षा ब्रीफिंग, जिसे ‘गुप्त’ और ‘विदेशी नागरिकों के लिए नहीं’ बताया गया था, वह सामने आई है। इसे बुधवार को जारी किया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टर एबीसी न्यूज ने मंगलवार को इससे जुड़े कुछ डॉक्यूमेंट्स हासिल किए हैं।

डॉक्यूमेंट्स का हवाला देते हुए एबीसी न्यूज ने बताया कि अमेरिका ने राजनयिक, सैन्य और खुफिया चैनलों के जरिए से भारत को समर्थन देने की प्लानिंग की थी, ताकि चीन के साथ सीमा विवाद जैसी महाद्वीपीय चुनौतियों का समाधान किया जा सके। इससे अमेरिका का उद्देश्य रक्षा सहयोग और अंतर-क्षमता के लिए एक मजबूत आधार का निर्माण करके सुरक्षा के नेट प्रोवाइडर के रूप में सेवा करने के लिए भारत की वृद्धि और क्षमता में तेजी लाना था।

वहीं, डॉक्यूमेंट्स में इसका भी जिक्र है कि ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के साथ अमेरिका को इंडो-पैसिफिक रणनीति को बेहतर करने की जरूरत है। इसमें जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ अमेरिका के सहयोग को गहरा करने और भारत के साथ एक क्वाड्रीलेटरल सुरक्षा संबंध बनाने के लिए कहा गया है।

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पिछले तीन वर्षों में, अमेरिका ने तीन महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक में किया गया संवेदनशील सैन्य जानकारी को दोनों देशों के बीच में रियल टाइम में साझा करना और सॉफिस्टिकेटेड टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर शामिल है। ये समझौते कम्युनिकेशन कॉम्पैटिबिलिटी एंड सिक्योरिटी एग्रीमेंट (COMCASA), मिलिट्री इन्फोर्मेशन एग्रीमेंट और बेसिक एक्सचेंज एंड कॉर्पोरेशन एग्रीमेंट (BECA) हैं। वहीं, हाल ही में एक विदाई संबोधन में, निवर्तमान अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने विशेष रूप से इन समझौतों का उल्लेख किया था और कहा कि था इससे द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी की बढ़ोतरी हुई है। 

उसी इवेंट के दौरान, जस्टर ने कहा था कि भारत-चीन सीमा गतिरोध के बीच अमेरिका ‘बहुत सहायक’ था, लेकिन और जानकारी देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि हम दोनों इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की एक दृष्टि साझा करते हैं और यह एक समावेशी दृष्टि है जो सभी देशों को विकसित होने और समृद्ध होने के अवसर प्रदान करता है।

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